Sunday 16 March 2008

सिज़ेरियन से प्रसव

कुदरती तरीके से हुए शिशु कुदरत की हिफाजत में संसार में आ जाते हैं। किन्तु कुछ कारणों की वजह से सीज़ेरियन का विकल्प रखना पड़ता है। सीज़ेरियन से हुए शिशु का सफर अलग होता है। नौ महीने माँ की कोख में पलने के बाद....जब एक शल्यक्रिया का निर्णय लिया जाता है तब कुदरत की बागड़ोर कुछ इंसानों के हाथ चली जाती है। कई बार जरूरी और कई बार बिना किसी खास अनुरूप तर्क के यह विकल्प चुना जाता है।

जब शिशु योनिमार्ग से नहीं गुजरता तो उसके फेफड़े का पानी ठीक से नहीं निचुड़ पाता। कुछ शिशु यह सामान्य तरीके से सहन कर लेते हैं। कुछ की साँस ज्यादा चलने लगती है। शिशु को इससे तकलीफ हो सकती है। इस स्थिति को ट्रान्सियन्ट टैकिप्निया ऑफ न्यूबॉर्न कहते हैं। योनिमार्ग से नहीं निकलने की वजह से सर पर कोन(कैपुट) भी नहीं बनता है।

सीज़ेरियन एक अहम शल्यक्रिया है। अन्य किसी भी शल्यक्रिया की ही तरह इसमें उतना ही खतरा है। यह खतरा कोई सर्जीकल या अनेस्थेटिक कौम्प्लीकेशन, करने वाले डॉक्टर के हुनर की कमी, बच्चे में किसी त्रुटि या फिर स्त्री के शरीर के किसी प्रतिकूल अनुक्रिया की वजह से हो सकती है। किन्तु जब यह आवश्यक हो तब माँ और शिशु दोनों के लिये जीवनदायिनी भी है।


जब भी योनिमार्ग से प्रसव का विकल्प शिशु या माँ के जीवन को खतरा बन सकता हो तब इस विकल्प का चुनाव किया जाता है।

विशेष कारण
• बहुमूल्य गर्भ
• दीर्ध एवं विषम प्रसव
• विपत्ति में शिशु ( फीटल डिस्ट्रस)
• विपत्ति में माता ( मैटर्नल डिस्ट्रस)
• समस्या जैसे प्री एकलम्पसिया( अधिक रक्तचाप), हर्पिस
• आपत्ति जैसे कि नाल का उतरना(कौर्ड प्रोलैप्स), उदर पर चीर पड़ना
• एक से अधिक गर्भ
• अस्वाभाविक गर्भस्थिति
• विफल गर्भ प्रवेशन
• सहायक विफल प्रसव (फेल्ड इन्स्ट्रूमेन्टल डेलिवरी)
• बड़ा शिशु
• आंवल संबंधित त्रुटि
• नाल संबंधित त्रुटि
• संविदागत(कोन्ट्राक्टड) पेल्विस

जैसे जैसे चिकित्सा ज्ञान ने प्रगति करी है,वैसे वैसे सीज़ेरियन सुरक्षित होता गया है। किन्तु जिस गति से इस हुनर का विकास हुआ है उससे काफी अधिक गति से इसके संख्या में वृद्धि हुई है। करीबन दस से पचास प्रतिशत प्रसव अब सीजेरियन से होने लगे हैं।

सोच कर थोड़ी हैरानी होती है कि अचानक इतनी वृद्धि के पीछे क्या शिशु और माँ के स्वास्थ्य और जीवन का लाभ ही है।

कारण कई हैं-
• सुविधा का सुलभ होना
• कारणों का गलत आंकलन
• डॉक्टर्स का ज्यादा फीस लेना का तरीका
• दर्दी का योनिमार्ग से प्रसव करने से इंकार
• महुरत और फैशनेबल ट्रैन्ड

वजह जो भी हो यह एक अत्यंत चिंता का विषय है। कुदरत का हाथ बँटाना और उसके साथ खिलवाड़ करना दो अलग बातें हैं। सीजेरियन से जन्मे बच्चों में शर्तिया तकलीफ अधिक होने की सँभावना ज्यादा होती है। यह तकलीफ इनफेक्शन, खून का अधिक बहाव, अगले गर्भ में तकलीफ, उदर में चीर पड़ने की सँभावना....वगैरह कुछ भी हो सकती है। वैसे भी आज भी कुदरत इंसान से अधिक निपुण है।

फिर रिमोट कंट्रोल हमारे हाथ में नहीं है। जहाँ कुदरती तरीके से प्रसव हो वहाँ कुदरत ध्यान रखती है कि शिशु प्रसव के बाद रोये, माँ आंवल के बाहर आते ही शिशु को दूध देने में सक्षम हो, माँ का स्तन भी उपयुक्त समय पर भर जाता है।

जब यह कंट्रोल इंसान के हाथ आता है तो सब कुछ हमेशा निर्विघ्न नहीं हो पाता।

सिज़ेरियन के पश्चात माँ को एक शल्यक्रिया के बाद मिलने वाली चौकसी की जरूरत होती है। दो हफ्ते तक माँ स्वतंत्र रूप से शिशु को देखने में पूरी तरह समर्थ नहीं होती। उदर और पेट पर जो चीर पड़ता है , वह भी भरने में समय लेता है।

सिज़ेरियन के बाद एक माँ कुदरती प्रसव और सिजेरियन...दोनो की तकलीफ सहती है। जहाँ सामान्य प्रसव एक फिसियोलौजिकल प्रोसेस है....सिज़ेरियन एक कृत्रिम अवस्था है....जिसकी जटिलताओं का ज्ञान आवश्यक है।

अपने डॉक्टर का चुनाव हमेशा सोच समझ कर करना चाहिये। डॉक्टर का समय पर सही फैसला लेने के लिये सचेत रहना जरूरी है....किन्तु व्यर्थ में कुदरती क्रिया में हस्तक्षेप गलत है।

दर्दी और उसके साथ के लोग अक्सर भावनात्मक स्तर पर ऐसे समय में इतने कमज़ोर होते हैं कि कई बार एकदम सही फैसला नहीं कर पाते।

एक चिकित्सक लेकिन संयत होना चाहिये कि सोच समझ सके कि उसके निर्णय का असर दर्दी पर क्या होगा-

Surgeons must be very careful
When they take the knife!
Underneath their fine incisions
Stirs the Culprit - Life!
~Emily Dickinson

2 comments:

Anonymous said...

Badhiya Jankaari, Agali baar kya aap sishu ke immunity ke baare me batayengee.

Ghost Buster said...

अत्यावश्यक जानकारी, अद्भुत प्रस्तुतीकरण. हृदय से धन्यवाद आपका.