Monday 26 May 2008

शिशु की त्वचा- भाग 1



टीवी और विज्ञापन में शिशु की त्वचा देखकर मन होता है काश ऐसी त्वचा हम सब को मिली होती। हर दूसरा तीसरा कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट वादा करता है की आपकी त्वचा को फिर से शैशव की ताज़गी देगी। लेकिन जानकर अचरज होगा की शिशु की त्वचा में सामान्य तौर पर ही भिन्नता नज़र आती है। कई बार पर्याप्त ज्ञान ना होने की वजह से इन्हे रोग समझ इनका उपाय ढूँढा जाता है। कई बार इन उपायों से नुकसान ज्यादा और फायदा कम होता है।
आज ज़रा देखें सुंदरता स्किन डीप होती है या इसके और मायने हैं....

क्रैडल कैप



शिशु के सर पर जमी पपड़ी को क्रैडल कैप कहते हैं। यह शिशु के सर की त्वचा के छिल कर निकलने का लक्षण है। कई वजह समझाई जाती है लेकिन यह शिशु को नुकसान नहीं पहुँचाती। अक्सर थोड़ा तेल मालिश और स्नान से धीमे धीमे त्वचा ठीक हो जाती है। अगर पपड़ी बहुत ज्यादा है या निकल नहीं रही हो तो डॉक्टर की सलाह लेकर खास शौम्पू और औइन्टमेन्ट इस्तेमाल करना पड़ सकता है। कई बार यह महीनों तक रह सकती है। सही उपाय से हफ्ते में ठीक भी हो सकती है।


एरीदिमा टॉक्सीकम



जन्म लेने के दूसरे दिन से शरीर के ऊपर लाल धब्बे नज़र आ सकते हैं। यह शरीर में कहीं भी हो सकते है सिवाय हथेली और पाँव के तलुओं के। कई बार इन के बीच की जगह में पीली छोटी फुँसियों सी निकली होती हैं। यह नवजात शिशु में अक्सर देखा जा सकता है । पहले एक दो हफ्ते बाद यह आप ही चले जाते हैं। सामान्य है इसीलिये जाहिर है इनके लिये कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।


मीलिया



यह बहुत छोटे सफेद मोती के रंग के मुँहासों की तरह शिशु के माथे, गाल और नाक पर हो सकते है । इनके बनने का कारण सीबम (चिकनाई बनाने वाले) ग्लैंड्स का अधूरा विकास है। इस वजह से सीबम या चिकनाई छोटे छोटे मोतियों से जमा हो जाते है। कुछ हफ्तों मे यह आप ही चले जाते है। इनके साथ छेड़कान नाकरने में ही समझदारी है।

मंगोलियन स्पॉट्स


मंगोलियन स्पॉट्स नीले, थोड़े हरे या स्लेटी रंग के निशान है जो उभरे नहीं होते। यह शिशु के पीठ और कूल्हे पर नज़र आता है। कुछ कुछ घाव के बाद पड़े नीले निशान जैसा। यह अफरीकन और एशिया के शिशुओं में सामान्य तौर पर देखने को मिलता है। जैसे जैसे शिशु बड़ा होता है यह निशान हल्के पड़ जाते है लेकिन पूरी तरह से गायब नहीं होते।
हाँ ,रोग तो ये बिल्कुल नहीं है।


पुस्चूलर मेलोनोसिस



पुस्चूलर मेलोनोसिस छोटे छोटे फफोलों की तरह उभरते है। जल्द ही सूख कर गिर जाते है। पीछे थोड़े गहरे रंग के निशान छोड़ते है। अक्सर काले शिशु में ज्यादा देखने को मिलते है।

मीलियारिया



मीलियारिया उभरे हुए द्रव से भरे छोटे फोफले होते है। यह द्रव साफ अथवा दूध सा सफेद होता है। यह पसीने की ग्रंथि के बंद होने की वजह से बनते है। यह अपने आप ही ठीक हो जाते है।

जाहिर है की उपरोक्त किसी भी बात के लिये परेशान होने की जरूरत नहीं है। इनमें से कोई भी रोग का लक्षण नहीं है। किंतु सुंदरता और शिशु के त्वचा को लेकर जो सामान्य धारणा है उससे भिन्न है। पहली बार बने माँ बाप अक्सर यह देख कर तनाव में आ जाते है। और जो समस्या ही नही उसके लिये उपाय ढूँढ़ते है।

चाहे आपके शिशु की त्वचा आपके परिभाषा अनुरूप प्रवीण ना भी हो....शिशु सुंदर ही है....

Afterall beauty is DEFINITELY NOT skin deep !!!






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3 comments:

सुशील कुमार said...

आज की पोस्ट में दी जानकारी अच्छी है। हमारी नैना के भी सिर पर पपडी और चेहरे पर लाल निशान थे। हमे चिंता रहती थी। खास कर चेहरे पर लाल निशान। डा. जी ने कहा था कि ठीक हो जाऐगा पर काफी दिनो तक ठीक नही हुआ। आप ऐसे ही अच्छी अच्छी जानकारी देती रहे। बिजी जी अब नैना ने दूध पीना छोड दिया है

सुनीता शानू said...

बहुत सही जानकारी देती है आपकी पोस्ट..

आभा said...

बहुत काम की पोस्ट, शुक्रिया