Tuesday 27 May 2008

ज़रा मुस्कुरा दो

ब्लॉग जगत में हर विवाद के बीच में कुछ कहने का मन हुआ है....आज सिर्फ अनुरोध है...ज़रा मुस्कुरा दो...एक मौका जिंदगी को दो...एक मासूमियत को... थोड़ी हँसी बहने दो....




(http://www.youtube.com/watch?v=mnbY2jALfqI)

कहीं सुना था....
If you HAVE to make a choice between being kind and being right....choose kindness

अगर कभी चुनाव के लिये दो ही विकल्प हो- सही साबित होना या उदार होना...उदारता चुनो

स्नेह से रहना और संयत होकर अपनी बात कहना इनके लिये तो मुश्किल नहीं लगता....

12 comments:

Rajesh Roshan said...

अपने अनुभव से बातें सीखी जाती हैं. ये तो उस ओर विचारते भी नही हैं.

Pramod Singh said...

आपके इस मुस्‍कानी उदारता के सुविचार से हिंदुस्‍तान को, या दुनिया में औरतों को जो आज जहां जितनी जगह मिली है, मिली होती? इस सवाल को इस एंगल से भी सोचियेगा. आप नेक़ व उदार हैं इसलिए इस तरह धृष्‍टता से ऐसे अपनी बात कह रहा हूं. मेरे कहने के तरीके से भले ऐतराज़ कीजियेगा, मेरे सवाल से नहीं..

मीत said...

Can "being kind" ever mean "Not being right" ? How can the two be mutually exclusive ??

Just choose kindness every time, and you'll be right 10 times out of 10.

Beji said...

प्रमोदजी,
मुस्कुराहट से तो दिल में ही जगह बनती है.... और यह जगह औरत ,आदमी, बच्चा, बूढ़ा कोई भी बना सकता है....
और जो जगह मुस्कुराहट नहीं बना सकती....वो गाली तो कतई नहीं बना सकती.....

Give a chance to this crooked line to straighten things up…!!

बाल किशन said...

बहुत अच्छे, सुंदर और प्यारे विचार है.
मीत से सहमत हूँ.

DR.ANURAG ARYA said...

ham muskra diye hai...

दिनेशराय द्विवेदी said...

बेजी अपने चेहरे पर 8.20 कभी नहीं बजते।
10.10 ही रहते हैं।
सब ऐसा ही रखें।
इस पोस्ट के लिए आप को बधाई।

Pratyaksha said...

sometimes you have to be right rather than kind ... and you will find later on that being right was being kind in the long run.

things are never as simple and linear as they appear. and if a smile solved everything we would be living in a world of angels. sadly the reality is much much far from this..

Beji said...

Yes Pratyakshadi,

A smile is not a solution...just an expression....before a series of wrongs which inevitably carry some elements of right....its a choice to say what needs to be without clouding it with a frown....and yes this expression has no side effects...
if being right is kind in the long run....then there was no difficulty in choosing that kind of being right or kindness.

सुशील कुमार said...

हम सब खूब हँसे अपनी नैना के साथ। हमारी नैना भी ऐसे ही करने से ऐसे ही हसँती है।
रही इन लोगो की बात,ये तो बडे लोग है इनकी बात भी बडे ही जाने।

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर एवं आवश्यक प्रस्तुति. साधुवाद.

आभा said...

अच्छी पोस्ट...