Monday 17 March 2008

फोलिक ऐसिड़ क्यूँ?!

सबसे पहले सबसे अहम बात
अगर शिशु का आग्रह हो तो गर्भ ठहरने के पहले से ही फोलिक ऐसिड. 400 mcg नियमित रोज़ ।

गर्भवति स्त्री को सब तरफ से सलाह और मशवरा मिलता है। ठंडा, गरम, सही, गलत.....बच्चे को सुंदर,सुशील और पता नहीं क्या क्या बना सकने के गूढ़ मंत्र सिखाये जाते हैं।

अगर मुझसे सिर्फ एक सलाह देने को कहा जाये तो मैं फोलिक ऐसिड़ के सेवन की सलाह दूँगी। वजह है।

• यह बच्चे के रीढ़ के विकास में आवश्यक है।
• अक्सर इसकी मात्रा आहार में कम होती है।
• कमी से रीढ और रीढ़ की हड्डी में गंभीर त्रुटि हो सकती है।
• यह किसी में भी हो सकती है।
• इस त्रुटि को 70 प्रतिशत तक मात्र फोलिक ऐसिड़ के सेवन से घटाया जा सकता है।

अक्सर स्त्री को अपने गर्भ की स्थिति के अंदाजे से पहले ही रीढ़ का विकास काफी हद तक संपूर्ण हो चुका होता है। यही वजह है कि गर्भ धारण करने की इच्छा हो तब से ही इसका सेवन शुरु करना जरूरी है।


खुली त्रुटि में दिमाग और/या रीढ़ के साथ हड्डी पर भी असर पड़ता है। रीढ़ और दिमाग का भाग अपनी परत के साथ या बगैर पीठ से बाहर आ सकता है। इन त्रुटियों को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के अंतर्गत माना जाता है। सपाइना बाइफिड़ा, मेनिंगोसील, एनेनकेफाली, एनकेफालोसील वगैरह इसके अंतर्गत आते हैं। गले के ऊपर के भाग से कमर के नीचे तक कहीं भी त्रुटि संभव है। त्रुटि की जगह की नसें प्रभावित होती हैं। उन नसों से जो क्रिया जुड़ी होती है वह भी प्रभावित होती है। उदाहरण के तौर पर अगर कमर में त्रुटि हुई तो दस्त और मूत्र का नियंत्रण नहीं रहता। शरीर के निचले हिस्से को लकवा मार जाता है।
जेनेटिक खामी भी इस त्रुटि के रूप में सामने आ सकती है। (ट्राइसोमी 13 और 18) कई बार अगर माँ अपस्मार के लिये दवा ले रही हो या इनसुलिन डिपेंडेंट डाइबेटिस से पीड़ित हो तब भी इस त्रुटि की सँभावना बढ़ जाती है।
गर्भ धारण करने के 28 दिन के भीतर ही यह भ्रूण में स्थापित हो जाती है।

सामान्य जनसँख्या में इस त्रुटि की सँभावना 0.1% होती है यानि की 1000 में से एक में सँभावना होती है।

त्रुटि की जाँच 16-18 हफ्ते में सँभव है।
• माता का सीरम आल्फा फीटोप्रोटीन टेस्ट(16-18 हफ्ता)
• हाई रेसोल्यूशन अल्ट्रासाउन्ड (18 हफ्ता)
• ऐम्नियोसेंटेसिस (15 हफ्ते के बाद)
इन जाँच प्रक्रिया का अपना जोखिम है । इनके लिये मंजूरी देने से पहले इन्हे समझना जरूरी है।
अगर पहले गर्भ में यह कमी पाई गई हो तो दूसरे में इसकी सँभावना और भी बढ़ जाती है। फोलिक ऐसिड़ की मात्रा भी बढ़ाने की जरूरत होती है।

निष्कर्ष यह कि
• शादीशुदा स्त्री को फोलिक ऐसिड नियमित लेना चाहिये।
• गर्भ धारण करने पर भी इसका सेवन जारी रहना चाहिये।
• किसी भी फार्मसी से 400mcg फोलिक ऐसिड़ ओवर द काउंटर मिल सकता है। रोज़ एक नियमित।


शारीरिक संरचना मे कोई भी त्रुटि हो....किसी भी कमी को व्यक्ति या शिशु में त्रुटि नहीं माना जा सकता। सभी त्रुटियों और कमियों के बावजूद....अगर किसी जीव में जीवन है तो वह अलग हो सकता है किन्तु संपूर्ण है।

कुदरत का ऐसा कोई निर्णय अगर हमारे हाथ आ जाये तो उसे स्वीकार कर परवरिश करना माता पिता का कर्तव्य ही नहीं....माता और पिता के अर्थ को सार्थक करने के लिये जरूरी भी है।