Thursday 15 January 2009

रोटावायरस से दस्त और उल्टी

आप लभी को नववर्ष की शुभकामनायें। काफी दिनों बाद इस चिट्ठे पर लिख रही हूँ। हाल ही में आराम का काम छोड़ मुश्किल काम हाथ लिया है। समय की व्यस्तता और नई जगह पाँव जमाने में स्पंदन में लिखना छूट गया। कोशिश रहेगी की नियमित लिख सकूँ।




दस्त और उल्टी की कई वजह है। रोटावायरस नाम का वायरस इसलिए विख्यात है क्योंकि यह अकेला संसार भर में बच्चों में इनका सबसे बड़ा कारण है। पाँच साल की उम्र तक पहुँचते पहुँचते दुनिया के हर बच्चे को कम से कम एक बार इसका चेप लग चुका होता है। हाँ बार बार भी बच्चा संक्रमित हो सकता है किंतु हर बार का संक्रमण का असर, रोग प्रतिकारक शक्ति की वजह से पिछली बार से कम होता है।
रोटावायरस डबल स्ट्रैन्डड(दुहरे रिबन जैसा) आर एन ए वायरस है। सात प्रकार के रोटावायरस- ए,बी,सी,डी ,ई,एफ और जी पाये जाते हैं। करीबन नब्बे प्रतिशत संक्रमण रोटावायरस ए से होता है।


अगर हम दुनिया भर में इससे पीड़ित बच्चे और मृत्युदर पर नज़र दौड़ायें तो इस रोग को समझने और सही उपाय करने की आवश्यकता से इंकार नहीं कर सकते। हमारे देश में लाखों की सँख्या में बच्चे साल भर इससे ग्रसित होकर मरते हैं।





कैसे फैलता है यह रोग

फीको-ओरल यानि की मल से मुख तक
जाहिर सी बात है हाथ धोने में लापरवाही, गंदा ( प्रदूषित) पानी या खाना खाने से, किसी रोगी के मल से किसी तरह संपर्क में आने से यह रोग फैलता है। इस वायरस की संक्रमण शक्ति लाजवाब है,ज़रा सी लापरवाही से रोग फैल जाता है।

आक्रमण प्रणाली
रोटावायरस सबसे पहले अंतड़ी के अस्तर पर लगी कोशिकाओं को संक्रामित करती हैं। वहाँ यह एन्डोटॉक्सिन बना कर दस्त की शुरुआत करती है। बच्चे को दस्त से पहले अक्सर उल्टी की शिकायत होती है। उल्टी और दस्त की बारंबारता इतनी अधिक होती है कि शरीर में पानी कम होने लगता है। पानी की कमी ही मृत्यु का मुख्य कारण बनती है। एंडोटॉक्सिन बना लेने पर बात खत्म नहीं होती। यह कोशिकाओं को इस तरह नुकसान पहुँचाती है कि सादा आहार भी पचा पाना मुश्किल हो जाता है। शरीर में यह बहुत तेज़ी से फैलती हैं और फिर दुगुने जोश से आक्रमण करती हैं।

अगर बच्चे को इससे पहले कभी यह संक्रमण हो चुका हो तो उसकी रोग प्रतिकारक शक्ति तुरंत पहचान लेती है। बचाव की रणनीति की वजह से पहली बार के संक्रमण जितना असर फिर नहीं दिखता। यही वजह है कि बड़ों में इसका असर होने पर भी तकलीफ कम होती है।




लक्षण

जुकाम जैसे लक्षण
हल्का बुखार
उल्टियाँ
दस्त

रोटावायरस की सबसे खास बात दस्त का बारंबार होना है...इतनी बार की पानी शरीर में कम हो जाता है। संक्रमित होने के दो दिन बाद लक्षण दिखने लगते हैं।

कोशिकाओं को नुकसान पहुँचने की वजह से दूध पचाने वाले एन्ज़ाइम पर खास असर पड़ता है। ऐसे में दूध देने पर दस्त की तकलीफ बहुत बढ़ जाती है।
यह तकलीफ रोग के हटने के बाद भी एक दो हफ्ते तक देखी जा सकती है।



जाँच
दस्त में रोटावायरस ए की जाँच की जाती है। इसे अधिकतर स्थानें में एन्ज़ाइम इम्यूनऐसे नाम की तकनीक से करते हैं।


इलाज

इसका कोई खास इलाज सँभव नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है शरीर में पानी की कमी ना होने देना। वक्त पर अस्पताल पहुँचना, ओ आर एस का घोल, उल्टी की दवा....वगैरह। बच्चे के अंदर नमक की मात्रा में फेर बदल, पानी की कमी और रक्त में ग्लूकोस की मात्रा पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। चूँकि लक्षण बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं समय पर अस्पताल पहुँचाना बहुत जरूरी है। कभी कबार इससे दिमाग पर भी असर पड़ सकता है। किंतु अधिकतर सही समय पर ध्यान देने पर जान बिना किसी और समस्या के बचाई जा सकती है

रोटावायरस कई देशों में डिसंबर से फरवरी के महीनों में होता है किंतु भारत में साल भर देखा जाता है।

http://www.youtube.com/watch?v=aaxcmEvfnDY


रोटावायरस की रस्सी (Rotavirus vaccine)

सन 2006 में इस रोग से लड़ने के लिए दो टीके बाज़ार में आये। ग्लैक्सोस्मितक्लाइन की रोटारिक्स और मर्क्ख की रोटाटेक़ (Rotarix by GlaxoSmithKline and RotaTeq by Merck) दोनो ही ओरल (मुँह से) लेने वाली हैं और इनमें रोगमुक्त जीवित वायरस हैं।


यह रोग सभी देशों में पाया जाता है। साधारण तापमान में यह वायरस बचा रहता है। सामान्य साफ सफाई भी इसका नुकसान नहीं पहुँचाती। बहुत कम मात्रा में भी यह बच्चे को गँभीर तरह से संक्रमित कर सकता है।

हम क्या कर सकते हैं-
1. साबुन से ठीक से हाथ धोना

यह अकेली एक आदत इतनी आसानी से बचाव कर सकती है की आश्चर्य होता है। रोगी के घर पर होने पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है।

2.प्रदूषित पानी और खाने से दूर रहना
3. रोटावायरस का ठीका लगवाना

जाहिर है इस ठीके की अहमियत पाँच साल के भीतर सबसे अधिक है। (रोटावायरस का ठीका लगाने पर रोग की संक्रमण शक्ति घटती है। या तो बच्चा इससे ग्रसित नहीं होता या फिर इसके लक्षण इतने तीव्र नहीं होते।)
4. अगर इन सबके बावजूद भी अगर यह रोग हो जाये तो समय पर डॉक्टर की सलाह अत्यावश्यक है।

ALL PICTURES AND VIDEOS HAVE BEEN USED PURELY FOR EDUCATIONAL PURPOSES,IF THERE IS ANY COPYRIGHT VIOLATION PLEASE INFORM THEY WILL BE REMOVED IMMEDIATELY.

8 comments:

Anonymous said...

I think the vaccine needs to be administered before the child's first Birthday, i.e. within first 12 months of age and preferably by the 8 month age.
more info

more from CDC.gov

Dr.Parveen Chopra said...

बढ़िया लेख --- पाठकों को यह बहुत ज्ञानवर्धक लगेगा और बहुत काम की बातें इस में दी गई हैं।

विनय said...

हम भी सोच में पड़े रहे कि हमारी पसंदीदा लेखिका की कलम रुकी हुई क्यों है, चलिए आप नियमित लिखें और इस तरह की जानकारी से हमें लाभ मिल सके...

--------
---मेरा पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें
आप भारतीय हैं तो अपने ब्लॉग पर तिरंगा लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

Udan Tashtari said...

काम की जानकारी, आभार.

Beji said...

Dear Anonymous reader,

Thanks for the link,actually a must read .

Amit said...

bahut acchi jaankaari...

शिवराज गूजर. said...

bahut hi gyanvardhak or swasthyavardhak jankari.badhai.
vaqt mile to mere blog (meridayari.blogspot.com)par bhi aayen.

शिवराज गूजर. said...

bahut hi gyanvardhak or swasthyavardhak jankari.badhai.
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