Tuesday 10 February 2009

रोटावायरस वैक्सीन



रोटावायरस पर पोस्ट लिखने के बाद महसूस किया कि रोटावायरस वैक्सीन के विषय में दी गई जानकारी बेहद संक्षिप्त है। और इसे लेकर कई सवाल अनुत्तरित रह गये।

तो प्रश्नोत्तर ही सही

1.पहली बार रोटावायरस वैक्सीन कब लोगों तक पहुँचा?
1998 में पहली बार वैयत्त कंपनी ने रोटाशील्ड़ के नाम से रोटावायरस का वैक्सीन उपलब्ध कराया। इसे बाज़ार में पहुँचाने से पहले किए गये शोध में कुछ हानिकारक नहीं पाया गया था। 1999 में इनेटससेप्शन (intussusception) ( आँत का एक तरह का जानलेवा अवरोध) की गुँजाइश बढ़ने की शंका के तहत इसे बाज़ार से हटा लिया गया। तब इसके फायदे को लेकर बहस गर्म हो गई।




फरवरी 2006 में FDA (Food and Drug Administration ) ने एक नये वैक्सीन RotaTeq (Merck) की अनुमति दी।




2.यह किस प्रकार की रस्सी (vaccine) है?
यह गाय और इंसान को ग्रसित करने वाले जीवित रोटावायरस से बना है। यह पाँच तरह के स्ट्रेन्स (serotypes G1, G2, G3, G4 and P1 )से सुरक्षा देता है।


3.इसे किस तरह दिया जाता है?
यह तरल है और मुँह से दिया जाता है


4.यह टीके किसे और कब लगने चाहिए?
Advisory Committee on Immunization Practices (ACIP) इसे एक साल के भीतर के बच्चों के देने की सिफारिश देती है।
इसके तीन डोस हैं जो की दूसरे, चौथे और छठे महीने में दिये जाते हैं। पहला डोस छह से बारह हफ्ते के बीच और आखिरी 32 हफ्ते से पहले दिया जाना चाहिए।
इसे बाकी टीकों के साथ दिया जा सकता है।

5.क्या ऐसे बच्चे को टीका लगाने की जरूरत है जो रोटावायरस से ग्रसित हो चुका है?
बच्चे को एक ही रोटावायरस के स्ट्रेन का संक्रमण हुआ होता है जबकि यह पाँच से सुरक्षा देता है। 32 हफ्ते से पहले इन्हे भी तीन टीके लगने चाहिए।


6.यह टीका कितना सुरक्षित है?
70000 बच्चों में रोग-विषयक जाँच में इसे सुरक्षित पाया गया है। किंतु इससे पहले के टीके के साथ कुछ शंकायें जुड़ी थी इसलिए इसकी जाँच और परीक्षण जारी है। इसे 32 हफ्ते के ऊपर के बच्चों में अभी देने की अनुमति नहीं है।

7.यह टीका रोग प्रतिरोध में कितना सक्षम है?
यह 74% रोटावायरस के मामले, 98% गँभीर संक्रमण, 96% अस्पताल के दाखिलों में कमी लाने में सक्षम है। दूसरे वायरस से होने वाले दस्त और उल्टी पर इसका कोई असर नहीं है।

8.किस तरह के दूसरे लक्षणों की इस वैक्सीन बतौर संभावना है?
कुछ बच्चों में (1%-3% ज्यादा संभावना) इसके देने पर सात दिन के भीतर दस्त और उल्टी देखा गया है।
और कोई गँभीर लक्षण नहीं देखा गया।

9.यह टीका किसे नहीं दिया जाना चाहिए?
- जिसे यह देने पर कोई रिएक्शन हुआ हो
- जिसे इसके किसी घटक से कोई जानलेवा अलर्जी हो
- जिन बच्चों को intussusception हुआ हो
-जो बच्चे बीमार हैं उन्हे कुछ रुककर वैक्सीन दिया जाना चाहिए।
-जिन बच्चों को HIV/AIDS हो, या जो स्टीरौयड्स पर हैं,जिनकी रोग प्रतिकारक क्षमता धटी हुई हो।
-जिन्हे हाल ही में खून या खून संबंधित कोई दवा दी गई हो।

10.क्या वैक्सीन से बीमारी हो सकती है?
नहीं

11.क्या रोटावायरस के लिए कोई और टीका भी है ?
हाँ रोटारिक्स (Rotarix)नाम का glaxo smithcline द्वारा निर्मित टीका भी है।







12.इसे कैसे और कब दिया जाता है?
इसके दो डोस है जिसे दूसरे और चौथे महीनों में दिया जा सकता है। पहला डोस छह हफ्ते के बाद और दूसरा कम से कम चार हफ्ते के अंतराल पर।

इसे भी मुँह से ही दिया जाता है और बाकी लक्षण रोटाटेक जैसे ही हैं।
कभी कभार चिड़चिड़ापन,भूख कम लगना,नाक का बहना और बुखार भी देखा गया है।


नोट


रोटावायरस का टीका लगना इसके नहीं होने की गारंटी नहीं देता। इसके इस्तेमाल से दुनियाभर में प्रतिवर्ष इससे ग्रसित होने वाले बच्चे और मृत्युदर को काफी हद तक घटाया जा सकता है।

32 हफ्ते से ऊपर के बच्चों में पर्याप्त जाँच की कमी होने की वजह से इसे अभी तक इनमें इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।






कोई भी टीका लगवाना या ना लगवाना माँ बाप तय कर सकते हैं।






अगर आप के बच्चे को वैक्सीन के बाद पेट में मरोड़, उल्टी,दस्त, दस्त में खून या पेट की किसी और प्रकार की तकलीफ उठे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसे VAERS (The Vaccine Adverse Event Reporting System)(http://vaers.hhs.gov/)को भी सूचित करें। यह Intussusception के लक्षण हो सकते हैं। Intussusception का 24 घंटो के भीतर इलाज करने पर बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।





(राधिका बुधकर जी के संशय पर ही यह पोस्ट लिखने की इच्छा हुई। उनका शुक्रिया।)

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