Saturday 18 April 2009

एपन्डिसाइटिस (appendicitis)

आज एपन्डिसाइटिस पर चर्चा करेंगे। बच्चों में पेट के ऑपरेशन का एक मुख्य कारण। अक्सर मातापिता लक्षणों को पूरी गँभीरता से नहीं लेते और देर होने की वजह से एपन्डिक्स का रप्चर (फूट कर फट जाना)हो जाता है। बच्चों में बाकी कारणों से भी निदान इतना आसान नहीं होता और कई बार डॉक्टर की लापरवाही से भी देर हो जाती है। आईये हम इस विषय को लेकर सजग हों।



एपन्डिसाइटिस क्या है?


एपन्डिसाइटिस एपन्डिक्स का संक्रमण है जिसकी वजह से उसमें सूजन और दर्द उठता है।

एपन्डिक्स क्या है?


एपन्डिक्स उँगली के समान एक छोटी थैली है जो बड़ी आँत से जुड़ी होती है और पेट के दाँये निछले हिस्से में पाई जाती है। एपन्डिक्स के सही कार्य का अब तक भी ठीक पता नहीं है। इसे मानव विकास में अवशेष ही माना गया है। शरीर का एक ऐसा हिस्सा जो अपनी क्षमता और कार्य खो चुका है।
इसकी थैली के अंदर जो बलगम (श्लेम )उत्पन्न होता है वह बड़ी आँत में पहुँच कर शरीर से निवृत होता है।
एपन्डिक्स को शरीर से निकालने पर आँत की कार्यक्षमता मे कोई कमी नहीं आती।

http://www.youtube.com/watch?v=9fN6sm5hu48




एपन्डिसाइटिस की वजह क्या है?

कुछ वजहों से एपन्डिक्स की थैली के मुँह का रास्ता बंद हो जाता है। बलगम अंदर इकट्ठा होने लगता है। उसके अंदर स्वाभाविक तौर पर उपस्थित बैक्टीरिया सँख्या में बढ़ने लगते हैं। एपन्डिक्स में संक्रमण होता है। सूजन और दर्द उठता है।

इस रुकावट का कारण मल, लिम्फ टिश्यू, इन्फ्लमेटरी बावल डिसीस, आँत में कहीं और संक्रमण, नहीं तो शरीर में कहीं और संक्रमण हो सकता है।
संक्रमित एपन्डिक्स फूट सकता है। ऐसी स्थिति में पूरे पेट में संक्रमण फैल जाता है। पेरिटोनाइटिस नाम की गँभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है और यह जानलेवा हो सकती है।



एपन्डिसाइटिस किसे हो सकता है?

यह किसी को भी हो सकता है। 10 से तीस बरस में इसकी सँभावना अधिक देखी गई है। एपन्डिसाइटिस पेट के ऑपरेशन की सबसे अहम वजहों में से एक है।

इसके लक्षण क्या हैं


एपन्डिसाइटिस का मुख्य लक्षण है पेट में दर्द उठना

यह दर्द इतना तीव्र होता है कि अक्सर नींद से बच्चा उठ कर बैठ जाता है। पहले नाभि के आसपास दर्द उठता है और फिर धीरे धीरे दाँई तरफ केंध्रित होता जाता है। कुछ ही घंटों में इसकी तीव्रता काफी बड़ जाती है। यह चलने फिरने में, गहरी साँस लेते वक्त और खाँसने या छींकने पर असहनीय हो जाता है।

बाकी लक्षण जो पाये जाते हैं

भूख कम लगना
उल्टी और उबका
दस्त
कब्ज
हवा छोड़ सकने मे अक्षमता
बुखार
पेट में सूजन

यह सभी लक्षण बाकी स्थितियों में भी उभर सकते हैं। किंतु इनके पाये जाने पर डॉक्टरी सलाह लेना अत्यावश्यक है।

http://www.youtube.com/watch?v=_RhH2Y3fjYI






एपन्डिसाइटिस का निदान कैसे किया जाता है?

डॉक्टर दर्दी की पड़ताल और कुछ खून की जाँच और दूसरे टेस्ट्स करने पर इस नतीजे तक पहुँच सकता है। अगर दर्दी की जाँच से ठीक ठीक निदान का अंदाज़ा लगता है तो कई बार डॉक्टर बिना आगे के टेस्ट्स किये ही ऑपरेशन के लिए दर्दी को तैयार करता है। एपन्डिक्स का उसके फूटने के पहले निकालना बहुत जरूरी है। सोनोग्राफी और सी टी स्कैन करने पर सही निर्णय पर पहुँच सकते हैं।




दर्दी से पूछा जाता है कि दर्द कब और कहाँ से शुरु हुआ और किस तरफ बढ़ा और इसकी तीव्रता सबसे अधिक कहाँ है। इससे पहले कभी ऐसी तकलीफ हुई हो तो यह बताना भी आवश्यक है।

डॉक्टर जाँच करते वक्त खास चिन्हों को तलाशते हैं। एपन्डिक्स होने पर पेट में गॉर्डिंग पाई जाती है- दर्दी अपने पेट की माँसपेशियों को छूते ही कड़क कर देता है। रिबाउन्ड टेन्डरनेस, रोवसिंग साईन, सोआस साईन और औबचुरेटर साईन- यह कुछ ऐसे चिन्ह है जिसके लिए तपास की जाती है।

खून में व्हाईट ब्लड सेल्स(सफेद कोशिकाएँ) की गिनती 15000 से अधिक हो सकती है। पानी और नमक की मात्रा में फेरबदल हो सकता है। पेशाब में संक्रमण भी पाया जा सकता है।




एपन्डिसाइटिस से निज़ाद पाने के लिए अक्सर शल्य चिकित्सा की जाती है। जल्द से जल्द ऑपरेशन करने पर एपन्डिक्स के फूटने और पेट में संक्रमण फैलने की सँभावना बहुत कम रहती है। इसे लैपरोटोमी नहीं तो लैपरोस्कोपी से किया जा सकता है। लैपरोटोमी में पेट में एक चीरा लगा कर एपन्डिक्स काट कर अलग किया जाता है। लैपरोस्कोपी में एक छेद के अंदर से ही ऑपरेशन किया जाता है। लैपरोस्कोपी से की गई शल्य चिकित्सा के बाद फिर से तंदुरुस्त होने में कम समय लगता है।




कभीकबार पेट खोलने पर सामान्य एपन्डिक्स दिखाई पड़ता है। ऐसे में भी कई डॉक्टर भविष्य में तकलीफ ना हो इसलिए एपन्डिक्स निकाल देते हैं। कभी पेट के खोलने पर कोई और तकलीफ सामने आती है जिसेकि शल्य चिकित्सा के दौरान ठीक किया जा सकता है।


एपन्डिक्स के फूटने या रप्चर होने पर एपन्डिक्स के आसपास पस जमा हो सकता है। यह पेट में गोले की तरह महसूस हो सकता है। इस पस को ऑपरेशन से पहले निकालना जरूरी है। इसके लिए पेट में एक नली रखनी पड़ सकती है। यह नली दो हफ्ते तक रखनी पड़ सकती है जिस दौरान दर्दी को ऐन्टिबायोटिक्स दिए जाते हैं। छह से आठ हफ्ते बाद जब संक्रमण काबू में आ जाता है तब ऑपरेशन करके एपन्डिक्स निकाला जाता है।



बिना शल्यचिकित्सा के ऐन्टीबायोटिक्स देकर शायद ही ठीक हो सकता है। किंतु अगर शल्य चिकित्सा में देर लगे तो ऐन्टीबायोटिक्स देना जरूरी है।

शल्यचिकित्सा के चार से छह हफ्तों में दर्दी पूरी तरह ठीक हो जाता है।


याद रखें
एपन्डिसाईटिस एक आपातकालीन स्थिति है जिसपर जल्द से जल्द ध्यान देना आवश्यक है।



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3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत उपयोगी जानकारी।

सुशील कुमार छौक्कर said...

शुक्रिया बेहतरीन जानकारी देने के लिए।

डा प्रवीण चोपड़ा said...

इस लेख के लिये आप ने बहुत मेहनत की है . परसों की अमर उजाला (22 अप्रैल) में आप के इस लेख के बारे में संपादकीय पन्ने पर ब्लॉग-कोना में पूरा आर्टिकल छपा है। हो सके तो आनलाइन देख लिजियेगा, वरना मैं स्कैन कर के आप को भेजता हूं.
धन्यवाद।